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Monday, November 1, 2010

अवसाद

समीक्षा

हर व्यक्ति कभी न कभी दुखी या उदास हो जाता है, लेकिन अक्सर यह अहसास क्षणिक होता है और कुछ ही दिनों में वह इस अहसास से उबर आता है ! जब कोई व्यक्ति अवसाद संबंधी विकार से पीड़ित होता है, तो यह विकार उस व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन और उसके सामान्य कामकाज में बाधा डालता है तथा उस व्यक्ति और उसके परिवारजनॉ के दुखों का कारण बन जाता है ! अवसाद एक सामान्य, लेकिन गंभीर रोग है और इससे पीड़ित लोगों को सही इलाज की ज़रूरत होती है !

ऐसे व्यक्ति, जो तनाव से पीड़ित होते हैं, वे अक्सर अपना इलाज नहीं कराते हैं, और अवसाद के लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं ! जबकि अधिकतर मामलों में अवसाद से गंभीर रूप से पीड़ित मरीज भी इलाज से बेहतर हो सकते हैं ! इस रोग के लिए हुई गहन शोधों से इस रोग से ग्रसित लोगों के इलाज के लिए अनेक औषधियां, साय्कोथेरेपी और इलाज के अन्य तरीके ईजाद हुए हैं !

लक्षण

यह ज़रूरी नहीं है कि अवसाद से पीड़ित मरीजों को समान लक्षणों का अनुभव हो ! रोग के लक्षणों की तीव्रता, बारंबारता और अवधि उस व्यक्ति और उसकी बीमारी पर निर्भर होते हुए अलग अलग होती है !

अवसाद के लक्षण

  • लगातार उदासी, बैचैनी या रिक्तता का एहसास
  • निरंतर निराश रहना या निराशावादी होना
  • शर्मिंदगी, अपराधबोध, मूल्यहीनता, अयोग्यता और लाचारी का भाव
  • अत्यधिक बैचैनी और परेशानी
  • किसी भी कार्यों में दिलचस्पी न लेना
  • थकान और ऊर्जा की कमी
  • एकाग्रता की कमी, बातें भूल जाना, निर्णय न ले पाना !
  • अनिंद्रा की शिकायत, सुबह जल्दी नींद खुलना या बहुत नींद आना !
  • अधिक मात्रा में भोजन का सेवन करना या भोजन में बिल्कुल भी रूचि न होना
  • मन में आत्महत्या के विचार आना या आत्महत्या की कोशिश करना
  • शरीर में लगातार दर्द का एहसास होना, सिरदर्द, पेट में मरोड या ऐंठन होना, खाना न पचना, इलाज के बावजूद अपच की समस्या दूर न होना

निदान

अगर आप अवसाद से पीड़ित हैं, तो आपको थकान, लाचारी, और नाउम्मीदी का एहसास हो सकता है ! इन हालातों में आपको खुद की मदद करना अत्यंत मुश्किल सा लग सकता है ! लेकिन यह जानना बेहद ज़रूरी है कि ये सारी मनोदशाएँ अवसाद का हिस्सा हैं और ये सही स्थिति को ठीक ढंग से नहीं दर्शाते हैं ! जैसे जैसे आप अपने अवसाद को पहचानने लग जाएंगे और उपचार की शुरूआत कर देंगे, तब नकारात्मक विचार गायब होते चले जाएंगे !

खुद की मदद करें

  • खुद को हल्के फुल्के कार्यों में या व्यायाम में व्यस्त रखें ! ऐसे कार्य करें, जिसमे आपको आनंद मिले, जैसे कि फिल्म देखना, बाल्गेम खेलना ! सामाजिक, धार्मिक या अन्य कार्यकमों में हिस्सा लें !
  • अपने लिए यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करें !
  • बड़े बड़े कार्यों को छोटे छोटे हिस्सों में बांटे, कुछ काम की प्राथमिकताएं निर्धारित करें और ऐसा कार्य करें, जिसे संपन्न करने की आपमें पूर्ण क्षमता हो !
  • अन्य लोगों के साथ समय बिताएं और किसी भरोसेमंद मित्र या रिश्तेदार के साथ अपनी गुप्त बातों को बताएं ! अपने आपको सबसे अलग थलग करने की कोशिश न करें और दूसरों को आपकी मदद करने दें !
  • इस बात की उम्मीद रखें कि आपकी मनोदशा धीरे धीरे सुधरेगी ! शीघ्रता से सुधरने की आशा न रखें ! अपने अवसाद से एक झटके में बाहर आने के चमत्कार की अपेक्षा न करें ! अक्सर ऐसा पाया जाता है कि इलाज के दौरान मनोदशा में ख़ास बदलाव आने से पहले मरीज की नींद और भोजन करने की इच्छा में सुधार आता है !
  • महत्वपूर्ण निर्णयों को टालें जैसे कि शादी करना या तलाक से संबंधित बातें या नौकरी बदलना ! अपने निर्णयों को अपने उन शुभचिंतकों के साथ बाटें, जो आपको भलीभांति जानते हों और आपकी स्थिति का सही आकलन करें !
  • इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि इलाज के दौरान जैसे जैसे आपकी स्थिति में सुधार होने लगेगा, वैसे वैसे आपके मन में नकारात्मक विचारों के स्थान पर सकारात्मक विचार आने लगेंगे!
यह जानकारी नेशनल इन्‍सटीट्यूट आफ हैल्‍थ द्वारा दी जा रही है । इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता सुनिश्‍चित करने का हर सम्‍भव प्रयास किया गया है पर इसकी नैतिक जि़म्‍मेदारी सामग्री प्रदाता की नहीं है ।

भारत के लिए अगला सत्र काफी महत्वपूर्ण

[सुनील गावस्कर की कलम से]

अच्छी शुरुआत से आधा काम आसान हो जाता है। आस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम ने भी ऐसा ही करके क्रिकेट के आगामी सत्र के लिए अपना आधार तैयार कर लिया है।

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में आगामी सत्र काफी महत्वपूर्ण है। इस दौरान भारत बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ मिलकर विश्व कप का आयोजन करेगा। साथ ही इससे पहले उसे दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर भी जाना है, जहां उसने आज तक कोई सीरीज नहीं जीती है। फिलहाल आस्ट्रेलियाई टीम का पूरा ध्यान इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली एशेज सीरीज पर है। एक अरसे के बाद टीम एशेज में कमजोर नजर आ रही है। भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज से उन्होंने अपनी खामियों के बारे में काफी कुछ जाना होगा। वॉर्न और मैक्ग्रा के जाने के बाद उनकी गेंदबाजी काफी कमजोर नजर आ रही है। अब उनके पास गिलक्रिस्ट जैसा मैच जिताऊ बल्लेबाज भी मौजूद नहीं है।

भारत को भी कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। जहीर शानदार गेंदबाजी कर रहे है, लेकिन अभी भी उन्हें दूसरे छोर पर एक अच्छे साथी की तलाश है। इशांत ने एक बार फिर फॉर्म में लौटने के संकेत दिए थे, लेकिन हाल के दिनों में वे चोट के चलते काफी परेशान रहे है। हरभजन का प्रदर्शन भी साधारण ही रहा है। अगर उन्हें शुरुआत में विकेट मिल जाए तो वे खतरनाक हो जाते है, लेकिन ऐसा न होने पर वे साधारण नजर आते है। प्रझान ओझा भी ज्यादातर समय साधारण ही नजर आते है। टी-20 के चलते गेंदबाजी काफी रक्षात्मक हो गई है। भारतीय स्पिनर्स आजकल गेंद को काफी कम फ्लाइट और लूप देते नजर आते है। सख्त विकेट पर उनका काम और मुश्किल हो जाएगा। बल्लेबाजी में हम बेहद मजबूत है। हालांकि राहुल द्रविड़ की फॉर्म समस्या बनी हुई है। उन्हें खेलते देख लगता नहीं है कि वे अपनी बल्लेबाजी का लुत्फ उठा रहे है। कप्तान के तौर पर महेंद्र सिंह धौनी बेहतरीन साबित हुए है। बल्लेबाजी में उनका प्रदर्शन हालांकि औसत ही रहा है। भविष्य में वे एक बड़ी पारी खेल सकते है और भारतीय क्रिकेट के लिए यह अच्छी बात साबित हो सकती है। सचिन रनों के बैंक की तरह हो गए है। वह शानदार फॉर्म में है और उम्मीद है कि वे आगे भी इसे जारी रखेंगे।

टोमैटो ओकरा सूप

सामग्री :

500 ग्राम ताजे टमाटर, 1 मध्यम आकार का प्याज मोटे टुकड़ों में कटा हुआ, 2 तेजपत्ता, 5-6 टुकड़े काली मिर्च, 1 टुकड़ा सेलरी, 100 ग्राम टोमैटो केचअप, स्वादानुसार नमक, 150 ग्राम भिंडी (ओकरा), तलने के लिए तेल, 50 ग्राम कटा हुआ लहसुन, 50 ग्राम मक्खन।


कितने लोगों के लिए : 4


विधि :

1. एक गहरा बर्तन लें और उसमें टमाटर, प्याज, तेजपत्ता, काली मिर्च और सेलरी के साथ एक लीटर पानी डालकर उबालें।

2. भिंडी को छोटे टुकड़ों में काट लें। फिर उन्हें एक पैन में तेल डालकर तलें और सुनहरा करके एक तरफ रख दें।

3. अब एक पैन में थोड़ा सा तेल डालकर गर्म करें और टमाटर डालकर तीस मिनट तक पकाएं। अब उसमें लहसुन डालकर धीमी आंच पर 5 मिनट तक पकाएं और ठंडा करके छानकर अलग कर लें।

4. छने हुए सूप को दोबारा आंच पर रखें और टोमैटो केचअप, नमक मिलाकर गाढ़ा करें। तली हुई भिंडी के साथ सर्व करें।


म. प्र. स्थापना दिवस

मध्य प्रदेश के ५५ वें स्थापना दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को शुभकामनायें| प्रदेश के 55वें स्थापना दिवस पर आज यानी 1 नवंबर को भोपाल को दो सौगातें मिल रही हैं। एक, शानदार नगर बस सेवा और दूसरी, अंतरराज्यीय बस अड्डा। 40 करोड़ की लागत से 6 साल में तैयार हुआ प्रदेश का पहला इंटर स्टेट बस टर्मिनस तमाम सुविधाओं वाला है।

इसकी बिल्डिंग में दिन में लाइटें जलाने की जरूरत नहीं होगी। इससे करीब 100 किलोवॉट बिजली रोज बचेगी। वहीं टर्मिनस में 74 बसें एक साथ खड़ी हो सकेंगी।

इधर नई नगर बस सेवा की शुरुआत के पहले दिन पारस सिटी से बैरागढ़ तक होगी। इस रूट पर 36 बसें चलेंगी जिनमें पहले दिन मुफ्त यात्रा करवाई जाएगी।