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Monday, January 31, 2011

राग स्विस कल्याणी की एक बंदिश

यहाँ प्रस्तुत पंक्तियाँ "श्री अशोक चक्रधर जी" की कलम से लिखी गयी है|


आयो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

यार से या हथियार से आयो,
ड्रग ट्रैफिक व्यापार से आयो
तस्करिया गलियार से आयो
पायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

नेता से या अभिनेता से आयो
लेता से आयो कि देता से आयो
लोकतंत्र के प्रणोता से आयो
लायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

कोरट ने अरदास लगाई
सीवीसी चुप आरबीआई
बात पते की नहीं बताई
खायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

ना कोई कुर्की ना कोई नालिश
ना कोई बंदिश ना कोई जुंबिश
स्विस कल्याणी की ये बंदिश
गायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

अंतर्यामी ये धन रब सा
अविगत अंतलरेक अजब सा
हम पर ये अन्याय गजब सा
ढायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

Mumbai Sonawane murder: Culprit Popat Shinde dies

The main accused of the murder of the Additional District Collector Yashwant Sonawane, Popat Shinde died today (Monday, Jan 31).

Popat, the oil mafia had more than 70 percent burnt injuries while he was admitted in JJ Hospital on Jan 25.


Shinde was the main accused who poured kerosene over Sonawane when the victim tried to take photographs of kerosene being stolen from an oil tanker. 

The main culprit received injuries when Sonawane held on to him after he was set on fire. 

एडीएम यशवंत सोनावणे के हत्यारे पोपट शिंदे की मृत्यु

कुछ दिनों पहले तेल माफिया के हाथों मारे गए मालेगांव के एडीएम यशवंत सोनावणे की हत्या करने वाले पोपट शिंदे ने आज जेजे हॉस्पीटल में दम तोड़ दिया।पोपट शिंदे ने सोनावणे के ऊपर करीब २० लीटर किरोसीन उड़ेल दिया था। इस घटनाक्रम में पोपट भी करीब 70 प्रतिशत जल गया था। यहां जेजे हॉस्पीटल में उसका इलाज चल रहा था और कुछ देर पहले उसने दम तोड़ दिया।

Friday, January 28, 2011

अगले 5 सालों में आर्थिक रुप से तबाह हो जाएगा चीन


जी हां अमेरिका के दिग्गज जानकार इस बात पर अपनी मुहर लगा चुके हैं कि अगले पांच सालों में चीन में जारी आर्थिक बुलबुला फूट जाएगा। साल 2016 तक चीन की अर्थव्यस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है। अमेरिका के 45 प्रतिशत आर्थिक जानकार मानते हैं कि 2016 तक चीन पूरी तरह से आर्थिक मंदी की भेंट चढ़ जाएगा। एक अमेरिकी वेबसाइट द्वारा अमेरीका में 1000 लोगों पर किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है इस सर्वे में बड़े आर्थिक जानकारों से लेकर निवेशक, ट्रेडर और एनालिस्ट शामिल थे। 
चीन का कुल सालाना कारोबार 3 ट्रिलियन डॉलर का है जिसमें 13 फीसदी चीन का व्यापार अमेरिका के साथ  होता है। चीन अर्थव्यस्था ने अभी हाल ही में जापान की इकोनॉमी को पीछे छोड़ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत का रुतबा हासिल किया है। लेकिन अधिकतर आर्थिक विशेषज्ञ इसे बबल कहते हैं क्योंकि जमीनी तौर पर चीन अभी भी कमजोर है।
चीन में निवेश करने वाले अभी भी खाली हाथ बैठे हैं चीन में बने लाखों अपार्टमेंट खाली पड़े हैं जबकि हजारों फैक्ट्रियों पर ताला जड़ा है। चीन में महंगाई दर 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है महंगाई दर को काबू में करने के लिए चीन ब्याज दरों को बढ़ा है जिसका असर विकास पर पड़ सकता है। इस सर्वे में 20 फीसदी लोगों ने अगले साल निवेश के लिए सबसे खतरनाक मार्केट चीन को माना जबकि पिछली साल यह आंकडा 11 प्रतिशत था।

क्रिकेट जगत की अबूझ पहेली हैं वाल्सन


 क्रिकेट जगत कर यह सबसे बड़ी पहेली हो सकती है कि एक खिलाड़ी विश्वकप विजेता टीम का सदस्य रहा हो, लेकिन उसे टूर्नामेंट ही नहीं अपने करियर में भी एक बार भी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का कभी मौका नहीं मिला। इस अबूझ पहेली का जवाब है भारत के बाएं हाथ के मध्यम गति के तेज गेंदबाज सुनील वाल्सन। 
वाल्सन 1983 में विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य तो थे लेकिन उन्होंने पूरा टूर्नामेंट ड्रेसिंग रूम में बैठकर एक दर्शक की तरह टीम को जीतते हुए देखकर गुजार दिया। यही नहीं वाल्सन भारत के लिए कभी कोई मैच नहीं खेल पाए। वाकई यह हैरानी की बात है कि जिस खिलाड़ी को विश्वकप टीम में चुना गया उसे कभी वनडे मैच खेलने का भी मौका नहीं दिया गया। विश्वकप जीतने के बाद यह सवाल बराबर उठता रहा था कि आखिर वाल्सन का टीम में चयन किस आधार पर किया गया था। यदि उनमें इतनी क्षमता थी कि वे विश्व कप टीम में चुने गए थे तो फिर उन्हें कभी भारत के लिए खेलने का मौका क्यों नहीं दिया गया?
आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद में जन्मे इस क्रिकेटर ने अपने प्रथम श्रेणी करियर में दिल्ली और रेलवे की तरफ से मैच खेले थे। उन्होंने 75 प्रथम श्रेणी मैचों में 212 विकेट लिए थे। उनका प्रथम श्रेणी करियर 1977 से लेकर 1988 तक चला था। 1983 की विश्वकप विजेता भारतीय टीम में कपिल देव, रोजर बिन्नी, मदनलाल और बलविंदर सिंह संधू जैसे मध्यम तेज गेंदबाज थे। इस टीम में मोहिंदर अमरनाथ भी धीमी मध्यम तेज गेंदबाजी किया करते थे। इन गेंदबाजों की उपस्थिति में वाल्सन के लिए टीम में वैसे ही कोई जगह नहीं थी। वाल्सन इस टीम में रहते हुए सिर्फ इंग्लैंड का भ्रमण कर भारत लौट आए थे।
इसके अलावा एक सवाल यह भी उठता है कि वाल्सन बेशक विश्व कप में कोई मैच नहीं खेल पाए थे, लेकिन उन्हें कम से कम एकाध अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका तो मिल ही सकता था। मगर उन्हें ऐसा मौका भी नसीब नहीं हुआ। इसी क्रम में जब विश्व विजयी भारतीय क्रिकेट टीम को जीत के 25 वर्ष पूरे होने पर जून, 2008 में एक स्वागत समारोह का आयोजन करा कर सम्मानित किया गया था तब उस कार्यक्रम में टीम के सभी सदस्य मौजूद थे। उस दौरान विजयी टीम के कप्तान कपिलदेव ने हर खिलाड़ी के लिए कुछ न कुछ कहा था। मगर जब बारी सुनील वाल्सन की आई तो कपिल ने बस इतना ही कहा, मुझे उनके लिए गहरा अफसोस है। यह वाकया आज भी एक ऐसी अबूझ पहेली है जिसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है।

शाही मशरूम


सामग्री :
200 ग्राम मशरूम, 4 प्याज, 7-8 टमाटर, 1 टुकड़ा अदरक, 2 हरी मिर्च, 1/2 टी स्पून नमक, 1/2 टी स्पून लाल मिर्च पाउडर, 1/2 टी स्पून गरम मसाला, 1 टी स्पून चीनी, 1 कप मलाई, 1/2 कप काजू का पेस्ट, 3 टे.स्पून घी, 1/2 कप बारीक कटा हरा धनिया।

कितने लोगों के लिए : 4


विधि :
मशरूम को 2 टुकड़ों में काट लें। प्याज भी बारीक काट लें। टमाटर, अदरक और हरी मिर्च को भी काट लें।
एक पैन में घी गर्म करें, जब तेल गरम हो जाए तो उसमें प्याज डालकर गुलाबी होने तक भून लें। अब इसमें टमाटर, अदरक और हरी मिर्च भी डाल दें।
जब टमाटर भी अच्छी तरह भुन जाए तो इसे आंच से उतारकर थोड़ा ठंडा होने दें। इस मिश्रण को मिक्सी में बारीक पीस लें।
अब पैन में डालकर इसमें नमक, लाल मिर्च, गरम मसाला, चीनी, क्रीम और काजू का पेस्ट भी डाल दें। 2-3 मिनट तक पका कर इसमें मशरूम भी डाल दें, हल्की आंच पर 5 मिनट तक पकने दें।
आंच से उतारकर बारीक कटे हरे धनिये से सजाकर गर्मागर्म शाही मशरूम नान या पराठो के साथ सर्व करें।
Healthy Cooking for Two (or Just You): Low-Fat Recipes with Half the Fuss and Double the Taste

Thursday, January 27, 2011

भूमि की उत्‍पादन क्षमता बढाने में जैव उर्वरकों का महत्‍व


रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से उपज में वृद्धि तो होती है परन्‍तू अधिक प्रयोग से मृदा की उर्वरता तथा संरचना पर भी प्रतिकूल प्रभाव पडता है इसलिए रासायनिक उर्वरकों (Chemical fertilizers) के साथ साथ जैव उर्वरकों (Bio-fertilizers) के प्रयोग की सम्‍भावनाएं बढ रही हैं। जैव उर्वरकों के प्रयोग से फसल को पोषक तत्‍वों की आपूर्ति होने के साथ मृदा उर्वरता भी स्थिर बनी रहती है। जैव उर्वकों का प्रयोग रासायनिक उर्वरकों के साथ करने से रासायनिक उर्वकों की क्षमता बढती है जिससे उपज में वृद्धि होती है।

जैव उर्वक क्‍या हैं: जैव उर्वरक जीवणू खाद है। खाद मे मौजूद लाभकारी शुक्ष्‍म जीवाणू (bactria) वायूमण्‍डल मे पहले से विद्धमान नाईट्रोजन को पकडकर फसल को उपलब्‍ध कराते हैं और मिट्टी में मौजूद अघुलनशील फास्‍फोरस (insolulable phosphorus) को पानी में घुलनशील बनाकर पौधों को देते हैं। इस प्रकार रासायनिक खाद की आवश्‍यकता सीमित हो जाती है।

वैज्ञानिक प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध किया जा चुका है कि जैविक खाद के प्रयोग से 30 से 40 किलो ग्राम नाइट्रोजन प्रति हैक्‍टेयर भूमि को प्राप्‍त हो जाती है तथा उपज 10 से 20 प्रतिशत तक बढ जाती है। अत: रासायनिक उर्वकों को थोडा कम प्रयोग करके बदले में जैविक खाद का प्रयोग करके फसलो की भरपूर उपज पाई जा सकती है। जैव उर्वक रासायनिक उर्वको के पूरक तो हैं ही साथ ही ये उनकी क्षमता भी बढाते हैं। फास्‍फोबैक्‍टीरिया और माइकोराइजा नामक जैव उर्वक के प्रयोग से खेत में फास्‍फोरस की उपलब्‍धता में 20 से 30 प्रतिशत की बढोतरी होती है।

मुख्‍यत: जैविक उर्वरक दो प्रकार की होती है: नाईट्रोजनी जैव उर्वरक तथा फास्‍फोरी जैव उर्वरक
जैव उर्वरकउपयुक्‍त फसलेंसंस्‍तुत प्रयोग विधिआवश्‍यक मात्रा
राइजोबियम Rhizobiumसभी दलहनी (pulses) फसलो के लिएबीजोपचार200 ग्राम प्रति 10-15 किग्रा बीज
एजोटोबैक्‍टर Azotobactorदलहनी फसलो को छोडकर अन्‍य सभी फसलों के लिएबीजोपचार, जड उपचार, व मृदा उपचार200 ग्राम प्रति 10-15 किग्रा बीज या 5 किग्रा प्रति हैक्‍टेयर
एजोस्पिरिलम Azospirilumदलहनी फसलो को छोडकर अन्‍य सभी फसलों के लिए, गन्‍ने के लिए विशेष उपयोगीबीजोपचार, जड उपचार, व मृदा उपचार200 ग्राम प्रति 10-15 किग्रा बीज या 5 किग्रा प्रति हैक्‍टेयर
फौफोबैक्‍टीरिया phosphobacteriaसभी फसलों के लिएबीजोपचार, जड उपचार, व मृदा उपचार200 ग्राम प्रति 10-15 किग्रा बीज या 5 किग्रा प्रति हैक्‍टेयर

जैव उर्वकों से लाभ: 
- ये अन्‍य रासायनिक उर्वकों से सस्‍ते होते हैं जिससे फसल उत्‍पादन की लागत घटती है।
- जैव उर्वरकों के प्रयोग से नाईट्रोजन व घुलनशील फास्‍फोरस की फसल के लिए उपलब्‍धता बढतीहैं।
- इससे रासायनिक खाद का प्रयोग कम हो जाता है जिससे भूमि की मृदा संरचना ।
- जैविक खाद से पौधों मे वृद्धिकारक हारमोन्‍स उत्‍पन्‍न होते हैं जिनसे उनकी की बढवार पर अच्‍छाा प्रभाव पडता है।
- जैविक खाद से फसल में मृदाजन्‍य रोगों नही होते।
- जैविक खाद से खेत मे लाभकारी शुक्ष्‍म जीवों (micro organism) की संख्‍या मे बढोतरी होती है।
- जैविक खाद से पर्यावरण सुरक्षित रहता है।
जैविक खाद का प्रयोग कैसे करें :
जैव उर्वरकों का प्रयोग बीजोपचार या जड उपचार अथवा मृदा उपचार द्वारा किया जाता है।
बीजोपचार:
1. 200 ग्राम जैव उर्वरक का आधा लिटर पानी में घोल बनाएं।
2. इस घोल को 10-15 किलो बीज के ढेर पर धीरे-धीरे डालकर हाथों से मिलाएं जिससे कि जैव उर्वरक अच्‍छी तरह और समान रूप से बीजों पर चिपक जाऐ ।
3. इस प्रकार तैयार उपचारित बीज को छाया में सुखाकर तुरन्‍त बुआई कर दें।
जड उपचार:
1. जैविक खाद का जडोपचार द्वारा प्रयोग रोपाई वाली फसलों मे करते हैं।
2. 4 किलोग्राम जैव उर्वरक का 20-25 लीटर पानी में घोल बनाऐं।
3. एक हैक्‍टेयर के लिए पर्याप्‍त पौध की जडों को 25-30 मिनट तक उपरोक्‍त घोल में डुबोकर रखें।
4. उपचारित पौध को छांया में रखे तथा यथाशीघ्र रोपाई कर दें।
मृदा उपचार:
1. एक हैक्‍टेयर भूमि के लिए, 200 ग्राम वाले 25 पैकेट जैविक खाद की आवश्‍यकता पडती है।
2. 50 किलोग्राम मिट्टी 50 किलोग्राम कम्‍पोस्‍ट खाद मे 5 किलोग्राम जैव उर्वरक कोअच्‍छी तरह मिलाऐं।
3. इस मिश्रण को एक हैक्‍टेयर क्षेत्रफल मे बुआई के समय या बुआई से 24 घंटे पहले समान रूप से छिडकें। इसे बुआई के समय कूंडो या खूडो में भी डाल सकते हैं।
ध्‍यान रखें कि :
नाईट्रोजनी जैव उर्वरकों के साथ फास्‍फोबैक्‍टीरिया का प्रयोग अत्‍यन्‍त लाभकारी है।
प्रत्‍येक दलहनी फसल के लिए अलग राईजोबियम कल्‍चर आता है अत: दलहनी फसल के अनुरूप ही राजोबियम कल्‍चर खरीदें और प्रयोग करें ।
जैव उर्वरकों को धूंप में कभी ना रखें। कुछ दिनों के लिए रखना हो तो मिट्टी के घडे का प्रयोग बहुत अच्‍छा है।
फसल विशेष के अनुसार ही जैविक खाद का चुनाव करें।
रासायनिक खाद तथा कीटनाशक दवाईयों से जैविक खाद को दूर रखें तथा इनका एक साथ प्रयोग भी ना करें।
कहां से लें:
जैव उर्वरकों के तैयार पैकेट खाद विक्रेताओं, किसान सेवा केन्‍द्रो एवं सहकारी समितियों से प्राप्‍त किये जा सकते हैं।

Monday, January 24, 2011

जोर लगा के....

हम नहीं सुधरेंगे

बचाओ

सड़क

लव स्टोरी

समोसा ने आलू से कहा: जब मैं फ्राय होता हूं तो तुम्हें कवर कर करके गरम तेल से बचा लेता हूं। क्योंकि मैं तुम्हें प्यार करता हूं। 
आलू: जब लोग तुम्हें फोड़ कर खाते हैं तो मैं उनक मुंह जला देता हूं। क्योंकि आई लव यू टू। 


मॉरल ऑफ स्टोरी: इनकी लव स्टोरी पर न जाएं समोसा ठंडा करके खाएं|


Just Dance 2

ईमानदारी


मैं सरकारी दफ्तर में खडा था और समझ में नहीं आ रहा था कि मेरी यह फाइल चल क्यों नहीं रही जबकि इसे बगल वाले बाबू के पास ही जाना है। अरे आप कैसे सरकारी कागज छू सकते हैं, बाबू बोला जब मैंने यह कहा कि इसमें क्या है मैं रख देता हूं। - बाहर चपरासी राम प्रसाद बेंच पर बैठा होगा उसे कह दीजिये। बाबू फिर बोला।।
बाहर जब मैंने राम प्रसाद से कहा तो वह बोला, इसमें दो पहिये भी तो लगाइये चलेगी। मैंने झिझकते हुये उसे दस का नोट दिया तो वह देखने लगा और बोला, और नहीं? मेरे नकारात्मक में सिर हिलाने पर फिर बोला, चलिये पहिले आप का काम कर दें। मेरी जान में जान आई। मैं बाबू से काम कराके गलियारे से होता हुआ सीढी तक पहुंच गया तभी पीछे से बाबू-बाबू की आवाज आई। मैंने पलट के देखा तो राम प्रसाद हांफता-कांखता आ रहा था, अरे बाबू, बाकी के आठ रुपये तो लेते जाओ।।
मैंने कहा, वो कैसे? वह कुछ रुक करके बोला, लगता है नये हो, रेट नहीं मालूम। फाइल इस मेज से उस मेज तक जाने के लिये दो पहियों की जरूरत होती है, यानी दो रुपये। हम लोग कोई ऐसे ही थोडे काम करते हैं, बाबू रेट के हिसाब से ईमानदारी से काम करते हैं।।

[अजय मोहन जैन] [कानपुर]

Friday, January 21, 2011

ये है दुनिया का सबसे महंगा मोबाइल नंबर


महंगे मोबाइल फोन के चर्चे तो आपने खूब सुने होंगे लेकिन हम आपको दुनिया के सबसे महंगे मोबाइल नंबर के बारे में बता रहे हैं। यह नंबर इतना महंगा है कि इतनी कीमत में आपको दर्जनों महंगे मोबाइल फोन मिल जाएंगे। इस नंबर की कीमत है 27.5 लाख डॉलर यानी करीब 12.69 करोड़ रुपए। और यह नंबर है 6666666। 

दुनिया के इस सबसे महंगे मोबाइल नंबर को बेचने वाली कतर की दूरसंचार कंपनी क्यूटेल को गिनीज बुक आफ व‌र्ल्ड रिका‌र्ड्स में भी जगह मिली है। आपको बता दें कि दुनिया का दूसरा सबसे महंगा मोबाइल नंबर बेचने का खिताब का चीन की एक दूरसंचार कंपनी के नाम पर दर्ज है। यह नंबर 4.8 लाख डालर यानी करीब 2 करोड़ 22 लाख रुपये में बेचा गया था। और यह नंबर है 8888-8888।

Thursday, January 20, 2011

शुरू हो गई एमएनपी, मात्र 19 रुपए में बदलो मोबाइल कंपनी



बिना नंबर बदले मोबाइल कंपनी बदलने की सुविधा यानि मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) आज से शुरू हो गई है। हालांकि हरियाणा में यह सर्विस पिछले साल नवंबर महीने के आखिर में ही शुरू कर दी गई थी, लेकिन आज से इस सर्विस को देशभर में लागू कर दिया गया है।

मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के शुरू होने के बाद कोई भी कस्टमर अपना नंबर बदले बिना, ऑपरेटर बदल सकेगा। यानी यदि ग्राहक अपने ऑपरेटर की सेवाओं से संतुष्ट नहीं है और वह दूसरे टेलिकॉम ऑपरेटर के साथ जुड़ना चाहता है तो इसके लिए उसे अपना फोन नंबर छोड़ने की जरूरत नहीं। अच्छी बात यह है कि इस सेवा का लाभ प्रीपेड और पोस्टपेड दोनों तरह के ग्राहक उठा सकते हैं।

कैसे बदलेगा ऑपरेटर?

अगर कोई मोबाइल उपभोक्ता अपनी मोबाइल कंपनी बदलना चहता है तो उसे अपने फोन से 1900 पर एक एसएमएस भेजना होगा। इस मैसेज में आपको सबसे आगे अंग्रेजी में PORT लिखना होगा। फिर एक स्पेस छोड़ कर अपना मोबाइल नंबर टाइप करना होगा। इसके बाद उपभोक्ता को उसके वर्तमान सेवा प्रदाता कंपनी की ओर से एसएमएस के रूप में एक यूनिक पोर्टिंग कोड प्राप्त होगा। उसके बाद नए सेवा प्रदाता के पास अपना नम्बर स्थानांतरित करने के लिए उपभोक्ता को उस कोड के साथ एक आवेदन पत्र भरना होगा। साथ अपना पहचान पत्र और निवास प्रमाण से जुड़े डॉक्यूमेंट भी देना होगा। बताया जा रहा है कि आवेदन करने के चार दिनों के भीतर उपभोक्ता की मोबाइल कंपनी बदल जाएगी। अपनी मोबाइल कंपनी को बदलने के लिए ग्राहकों को शुल्क के तौर पर केवल 19 रुपए चुकाने होंगे।

इन बातों का रखें ध्यान

अगर आपके प्रीपेड मोबाइल में बैलेंस बचा है तो उसका इस्तेमाल कर लें। क्योंकि मोबाइल कंपनी बदलने के बाद आपका पुराना बैलेंस अपने आप ही शुन्य हो जाएगा। हां, एक और जरूरी बात यह है कि अगर आप अपने पोस्टपेड कनेक्शन पर एमएनपी का फायदा उठाना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है कि आपका पुराना बिल बकाया नहीं होना चाहिए।
आप CDMA से GSM या GSM से CDMA में जा सकते है, लेकिन एक राज्य से दूसरे राज्य में Operator नहीं बदल सकते|

Friday, January 14, 2011

अब कहो न प्यार है!!!!

भोपाल. प्यार में अंधे एक युवक ने शादी के पहले स्टॉम्प पेपर पर लिखित रूप में शर्ते स्वीकार की। शादी के बाद पत्नी ने शर्त के अनुसार शाम सात बजे के बाद आने पर उसे घर में नहीं घुसने दिया गया तो युवक ने पुलिस को फोन करके आत्महत्या की धमकी दे डाली। मामला राजधानी के हबीबगंज थाने का है।


कोलार निवासी आशीष श्रीवास्तव (परिवर्तित नाम) ने हबीबगंज थाने के सीएसपी राजेश सिंह भदौरिया को फोन पर धमकी देते हुए कहा उसकी पत्नी उसे घर में नहीं घुसने दे रही है और वो पिछले दो दिनों से रेलवे स्टेशन पर सो रहा है।


यदि उन्होंने उसके मामले में हस्तक्षेप नहीं किया तो वो आत्महत्या कर लेगा। सीएसपी राजेश सिंह भदौरिया ने उसे सांत्वना देते हुए हबीबगंज थाने के परामर्श केंद्र पर पत्नी के साथ बुलाया।


काउंसलर कविता मौर्य और दिशा जैन ने जब दोनों की कांउसलिंग की तो पता चला आशीष और सुरभि (परिवर्तित नाम) ने वर्ष 2007 में लव मैरिज की थी।अफेयर के दौरान सुरभि ने कुछ शर्ते स्टॉम्प पेपर में लिखकर दी थी और उस पर दस्तखत करने कहा। आशीष ने काउंसलर को बताया कि सुरभि से शादी करने के लिए उसने स्टॉम्प पेपर पर दस्तखत कर दिए। उसे नहीं मालूम था कि शर्ते इतनी महंगी पड़ेगी।


सुरभि ने स्टांप पेपर पर लिखी शर्तो पर अमल करना शुरु कर दिया। सुरभि ने काउंसलर को बताया कि मैं भी आशीष से प्यार करती हूं पर उस पर मुझे भरोसा नहीं था कि वह जो कह रहा है उसे पूरा करेगा। यही सोचकर मैंने स्टॉम्प पेपर पर दस्तखत करवाए थे।


निकाल दिया घर से


आशीष ने बताया कि वह मल्टी नेशनल कंपनी में काम करता है और कई बार लेट हो जाता है तो सुरभि उसे घर में घुसने नहीं देती है। पिछले डेढ़ साल में कई बार वह प्लेटफार्म पर सोया है। यही नहीं वह घर वापस लौटने पर तुरंत मुंह सूंघ कर देखती है कि कहीं मैंने शराब तो नहीं पी। उसने बताया कि एक दिन तो सुरभि ने शक के आधार पर कि मैंने शराब पी है उसने पैथालॉजी ले जाकर ब्लड टेस्ट कराया। अल्कोहल की मात्रा चेक कराने हबीबगंज पुलिस पर भी दबाव बनाया।


सुरभि ने काउंसलर को बताया कि आशीष ने तीन साल में आठ बार शराब पी और उससे नहीं पूछा, जबकि आशीष ने बताया कि उसने कुल पांच बार शराब पी वो भी बताकर।


हुआ समझौता


कविता मौर्या और दिशा जैन ने काउंसलिंग के बाद दोनों के बीच लिखित समझौता कराया। इसमें सुरभि को आशीष पर शक न करने, सात बजे के बाद घर के अंदर आने देने और बिना वजह दबाव न बनाने की समझाइश दी। इसके अलावा आशीष का अलग से अकाउंट भी खुलवाया गया,ताकि उसे आर्थिक स्वतंत्रता मिल सके। आशीष को सुरभि के साथ मिलजुल कर काम करने की समझाइश दी गई। दोनों ने लिखित रूप से स्वीकार किया वे अब आपस में झगड़ा नहीं करेंगे।


थाने में एक प्रकरण आया था जिसमें एक युवक ने पत्नी की हरकतों से तंग आकर आत्महत्या करने की धमकी दी थी। युवक ने लव मैरिज की थी और उसने शादी के पहले स्टॉम्प पेपर पर शर्तो को लिखित रुप में स्वीकार किया था। वर्तमान में उन्हीं शर्तो की वजह से आपस में झगड़ा हो रहा है। दोनों की काउंसलिंग करवाकर समझौता कर दिया गया है।-राजेश सिंह भदौरिया,सीएसपी,हबीबगंज थाना


क्या थीं शादी की शर्ते


एक समय का खाना मैं बनाऊंगी और एक समय तुम।शाम को सात बजे के पहले घर आ जाओगे नहीं तो बाहर सोओगे।रात को नौ बजे के बाद घर में टीवी नहीं चलेगा।पे अकाउंट में मेरे साथ संयुक्त रुप से होगा।घर खर्च में पहले तुम्हारे रुपयों का उपयोग होगा।जो मकान खरीदोगे उसकी रजिस्ट्री मेरे नाम पर होगी।मोबाइल पर तुरंत बात करोगे, टालोगे नहीं।शराब पूछ कर पीओगे।मां से मिलने नहीं जाओगे।

Thursday, January 6, 2011

जहाज का राज़


उन्नीसवीं सदी की ये सबसे रहस्यमयी समुद्री घटना है। 4 दिसंबर 1872 की बात है, अटलांटिक सागर में एक व्यापारी जहाज मिला था। मैरी सेलेस्टी नामक ये जहाज पूरी तरह सुरक्षित था लेकिन उसमें इंसान का नामोनिशान नहीं था। बावजूद इसके की उन दिनों मौसम भी साफ रहा था और जहाज का स्टाफ तजुर्बेकार था।


जहाज की कंडीशन भी अच्छी थी और स्ट्रेट ऑफ गिबराल्टर की तरफ उसका सफर जारी था। ये जहाज समुद्र में एक महीने से था और उसमें खाने-पीने का सामान अगले छह महीनों के लिए पर्याप्त था।


जहाज के हालात देखकर पता चलता था कि किसी चीज को हाथ तक नहीं लगाया गया है। यहां तक की यात्रियों का सामान भी अनछुआ अपनी जगह पर रखा था। इसमें बहुत सा कीमती सामान भी था। इसके बाद इन लोगों को कभी भी कहीं भी देखा नहीं गया और न ही इनके बारे में सुना गया। ये इतिहास की सबसे बड़ा समुद्री रहस्य है। 1861 में ये नोवा स्कोटिया के स्पैंसर आईलैंड के एक छोटे से गांव में बनाया गया था। इस छोटे समुदाय द्वारा बनाए गए पहले बड़े जहाजों में से ये एक था। इसका नाम एमाज़ॉन रखा गया था।


सबसे पहले आठ लोगों ने मिलकर इसे खरीदा था। इसके पहले कैप्टन थे रॉबर्ट मैक लैलन। जहाज की कमान हाथ में लेने के नौ दिन बाद ही उन्हें निमोनिया हो गया और पहली ही यात्रा में उनकी जान चली गई। इसके बाद दो और कैप्टन्स की भी जहाज पर ही जान गई। ये जहाज कभी फायदे में नहीं रहा। इसके मालिकों को नुकसान ही उठाना पड़ा।


इसलिए ये जहाज बदनाम हो गया और बार-बार बिकता गया। आखिरकार 1870 में इसे न्यूयॉर्क भेजा गया, जहां रिपेयरिंग के बाद इसे मैरी सेलेस्टी नाम दिया गया। इस बार जहाज के कैप्टन बने बैंजामिन ब्रिग्स। 1872 के इस हादसे में ब्रिग्स ही कैप्टन थे।


इसके बाद ये जहाज कई बार बिका लेकिन खरीदने वाले घाटे में ही रहे। इसकी बदनामी के चर्चे मशहूर हो गए थे। 1885 में इसके मालिक थे जीसी पार्कर, उन्होंने जहाज डुबाकर इंशोरेंस का पैसा वसूलना चाहा था। हुआ इसका उलटा, जहाज नहीं डूबा।


इसके बाद उन्होंने जहाज में आग लगाने का फैसला किया। इस मामले की जांच में उनका राज़ खुल गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया। ये बात अलग है कि सजा से पहले उनकी मौत भी रहस्यमयी तरीके से हो गई थी। इसकी रहस्यमयी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आज भी इसके वजूद को लेकर बहस जारी है।

तस्वीर


यह तस्वीर 1919 में ली गई थी। ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स से रिटायर हो चुके सर विक्टर गोडार्ड ने इसे पहली बार 1975 में छपवाया था। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान उनके स्क्वाड्रन का यह फोटो था। ये दल एचएमएस डेडालस जहाज पर तैनात था। इस तस्वीर में सर विक्टर गोडार्ड को एक रहस्यमयी बात नजर आई थी।

ऊपर से पहली लाइन में दाईं तरफ से चौथे नंबर पर एयरमैन फ्रेडी जैकसन खड़े नजर आ रहे हैं। इस एयर मैकेनिक की मौत यह तस्वीर लिए जाने से दो दिन पहले एक दुर्घटना में हो गई थी। इस दिन उनका अंतिम संस्कार हुआ था। फिर वे इस तस्वीर में कैसे नजर आ रहे हैं, ये बात आज तक कोई नहीं समझा सका है।

ऐसा भी नहीं है कि सर विक्टर ने फ्रेडी को पहचानने में गलती की है। उनके दल के सभी सदस्यों को यह तस्वीर दिखाई गई और सभी ने कहा ये फ्रेडी ही हैं। मरने के बाद अपने साथियों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए कुछ देर के लिए वे कैसे लौटे?