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Monday, November 1, 2010

भारत के लिए अगला सत्र काफी महत्वपूर्ण

[सुनील गावस्कर की कलम से]

अच्छी शुरुआत से आधा काम आसान हो जाता है। आस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम ने भी ऐसा ही करके क्रिकेट के आगामी सत्र के लिए अपना आधार तैयार कर लिया है।

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में आगामी सत्र काफी महत्वपूर्ण है। इस दौरान भारत बांग्लादेश और श्रीलंका के साथ मिलकर विश्व कप का आयोजन करेगा। साथ ही इससे पहले उसे दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर भी जाना है, जहां उसने आज तक कोई सीरीज नहीं जीती है। फिलहाल आस्ट्रेलियाई टीम का पूरा ध्यान इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली एशेज सीरीज पर है। एक अरसे के बाद टीम एशेज में कमजोर नजर आ रही है। भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज से उन्होंने अपनी खामियों के बारे में काफी कुछ जाना होगा। वॉर्न और मैक्ग्रा के जाने के बाद उनकी गेंदबाजी काफी कमजोर नजर आ रही है। अब उनके पास गिलक्रिस्ट जैसा मैच जिताऊ बल्लेबाज भी मौजूद नहीं है।

भारत को भी कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। जहीर शानदार गेंदबाजी कर रहे है, लेकिन अभी भी उन्हें दूसरे छोर पर एक अच्छे साथी की तलाश है। इशांत ने एक बार फिर फॉर्म में लौटने के संकेत दिए थे, लेकिन हाल के दिनों में वे चोट के चलते काफी परेशान रहे है। हरभजन का प्रदर्शन भी साधारण ही रहा है। अगर उन्हें शुरुआत में विकेट मिल जाए तो वे खतरनाक हो जाते है, लेकिन ऐसा न होने पर वे साधारण नजर आते है। प्रझान ओझा भी ज्यादातर समय साधारण ही नजर आते है। टी-20 के चलते गेंदबाजी काफी रक्षात्मक हो गई है। भारतीय स्पिनर्स आजकल गेंद को काफी कम फ्लाइट और लूप देते नजर आते है। सख्त विकेट पर उनका काम और मुश्किल हो जाएगा। बल्लेबाजी में हम बेहद मजबूत है। हालांकि राहुल द्रविड़ की फॉर्म समस्या बनी हुई है। उन्हें खेलते देख लगता नहीं है कि वे अपनी बल्लेबाजी का लुत्फ उठा रहे है। कप्तान के तौर पर महेंद्र सिंह धौनी बेहतरीन साबित हुए है। बल्लेबाजी में उनका प्रदर्शन हालांकि औसत ही रहा है। भविष्य में वे एक बड़ी पारी खेल सकते है और भारतीय क्रिकेट के लिए यह अच्छी बात साबित हो सकती है। सचिन रनों के बैंक की तरह हो गए है। वह शानदार फॉर्म में है और उम्मीद है कि वे आगे भी इसे जारी रखेंगे।

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