समीक्षा
हर व्यक्ति कभी न कभी दुखी या उदास हो जाता है, लेकिन अक्सर यह अहसास क्षणिक होता है और कुछ ही दिनों में वह इस अहसास से उबर आता है ! जब कोई व्यक्ति अवसाद संबंधी विकार से पीड़ित होता है, तो यह विकार उस व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन और उसके सामान्य कामकाज में बाधा डालता है तथा उस व्यक्ति और उसके परिवारजनॉ के दुखों का कारण बन जाता है ! अवसाद एक सामान्य, लेकिन गंभीर रोग है और इससे पीड़ित लोगों को सही इलाज की ज़रूरत होती है !
ऐसे व्यक्ति, जो तनाव से पीड़ित होते हैं, वे अक्सर अपना इलाज नहीं कराते हैं, और अवसाद के लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं ! जबकि अधिकतर मामलों में अवसाद से गंभीर रूप से पीड़ित मरीज भी इलाज से बेहतर हो सकते हैं ! इस रोग के लिए हुई गहन शोधों से इस रोग से ग्रसित लोगों के इलाज के लिए अनेक औषधियां, साय्कोथेरेपी और इलाज के अन्य तरीके ईजाद हुए हैं !
ऐसे व्यक्ति, जो तनाव से पीड़ित होते हैं, वे अक्सर अपना इलाज नहीं कराते हैं, और अवसाद के लक्षणों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं ! जबकि अधिकतर मामलों में अवसाद से गंभीर रूप से पीड़ित मरीज भी इलाज से बेहतर हो सकते हैं ! इस रोग के लिए हुई गहन शोधों से इस रोग से ग्रसित लोगों के इलाज के लिए अनेक औषधियां, साय्कोथेरेपी और इलाज के अन्य तरीके ईजाद हुए हैं !
लक्षण
यह ज़रूरी नहीं है कि अवसाद से पीड़ित मरीजों को समान लक्षणों का अनुभव हो ! रोग के लक्षणों की तीव्रता, बारंबारता और अवधि उस व्यक्ति और उसकी बीमारी पर निर्भर होते हुए अलग अलग होती है !
अवसाद के लक्षण
- लगातार उदासी, बैचैनी या रिक्तता का एहसास
- निरंतर निराश रहना या निराशावादी होना
- शर्मिंदगी, अपराधबोध, मूल्यहीनता, अयोग्यता और लाचारी का भाव
- अत्यधिक बैचैनी और परेशानी
- किसी भी कार्यों में दिलचस्पी न लेना
- थकान और ऊर्जा की कमी
- एकाग्रता की कमी, बातें भूल जाना, निर्णय न ले पाना !
- अनिंद्रा की शिकायत, सुबह जल्दी नींद खुलना या बहुत नींद आना !
- अधिक मात्रा में भोजन का सेवन करना या भोजन में बिल्कुल भी रूचि न होना
- मन में आत्महत्या के विचार आना या आत्महत्या की कोशिश करना
- शरीर में लगातार दर्द का एहसास होना, सिरदर्द, पेट में मरोड या ऐंठन होना, खाना न पचना, इलाज के बावजूद अपच की समस्या दूर न होना
निदान
अगर आप अवसाद से पीड़ित हैं, तो आपको थकान, लाचारी, और नाउम्मीदी का एहसास हो सकता है ! इन हालातों में आपको खुद की मदद करना अत्यंत मुश्किल सा लग सकता है ! लेकिन यह जानना बेहद ज़रूरी है कि ये सारी मनोदशाएँ अवसाद का हिस्सा हैं और ये सही स्थिति को ठीक ढंग से नहीं दर्शाते हैं ! जैसे जैसे आप अपने अवसाद को पहचानने लग जाएंगे और उपचार की शुरूआत कर देंगे, तब नकारात्मक विचार गायब होते चले जाएंगे !
खुद की मदद करें
- खुद को हल्के फुल्के कार्यों में या व्यायाम में व्यस्त रखें ! ऐसे कार्य करें, जिसमे आपको आनंद मिले, जैसे कि फिल्म देखना, बाल्गेम खेलना ! सामाजिक, धार्मिक या अन्य कार्यकमों में हिस्सा लें !
- अपने लिए यथार्थवादी लक्ष्य निर्धारित करें !
- बड़े बड़े कार्यों को छोटे छोटे हिस्सों में बांटे, कुछ काम की प्राथमिकताएं निर्धारित करें और ऐसा कार्य करें, जिसे संपन्न करने की आपमें पूर्ण क्षमता हो !
- अन्य लोगों के साथ समय बिताएं और किसी भरोसेमंद मित्र या रिश्तेदार के साथ अपनी गुप्त बातों को बताएं ! अपने आपको सबसे अलग थलग करने की कोशिश न करें और दूसरों को आपकी मदद करने दें !
- इस बात की उम्मीद रखें कि आपकी मनोदशा धीरे धीरे सुधरेगी ! शीघ्रता से सुधरने की आशा न रखें ! अपने अवसाद से एक झटके में बाहर आने के चमत्कार की अपेक्षा न करें ! अक्सर ऐसा पाया जाता है कि इलाज के दौरान मनोदशा में ख़ास बदलाव आने से पहले मरीज की नींद और भोजन करने की इच्छा में सुधार आता है !
- महत्वपूर्ण निर्णयों को टालें जैसे कि शादी करना या तलाक से संबंधित बातें या नौकरी बदलना ! अपने निर्णयों को अपने उन शुभचिंतकों के साथ बाटें, जो आपको भलीभांति जानते हों और आपकी स्थिति का सही आकलन करें !
- इस बात को हमेशा ध्यान में रखें कि इलाज के दौरान जैसे जैसे आपकी स्थिति में सुधार होने लगेगा, वैसे वैसे आपके मन में नकारात्मक विचारों के स्थान पर सकारात्मक विचार आने लगेंगे!
यह जानकारी नेशनल इन्सटीट्यूट आफ हैल्थ द्वारा दी जा रही है । इस जानकारी की सटिकता, समयबद्धता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है पर इसकी नैतिक जि़म्मेदारी सामग्री प्रदाता की नहीं है ।
अच्छी जानकारी है , एक लिंक देती हूँ ,जिस पर मैनें अवसाद को दूर करने के लिए कारगर बातें लिखीं हैं , अभी कुछ बातें लिखनी बाकी हैं , कृपया इसे मुख्य पृष्ठ से पढ़ें , http://sharda-arora.blogspot.com/ मानसिक अवसाद से कैसे बचें ....अपना रास्ता स्वयं आलोकित करें
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