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Friday, October 22, 2010

युवा बल्लेबाजों को सलाम

[रवि शास्त्री की कलम से]

टीम इंडिया ने आस्ट्रेलिया का जिस तरह सूपड़ा साफ किया, वह मेरे दौर के क्रिकेटरों और संभवत: उससे पहले के क्रिकेटरों के लिए भी सोच से परे की बात हो सकती है। इस टीम ने जो सफलता अर्जित की, वह भारतीय क्रिकेट युग की अब तक की एकमात्र और शानदार जीत कही जा सकती है।

एक दिवसीय सीरीज में भी बुधवार को खेले गए मैच में युवाओं ने बेजोड़ नमूना पेश किया। टॉस जीतने के बाद क्षेत्ररक्षण के लिए उतरना और उसके बाद बड़े स्कोर का पीछा करके, उसे जीत में बदल देना, भारतीय युवाओं का यह जज्बा काबिले तारीफ है। आस्ट्रेलियाई टीम में भी हालांकि युवा क्रिकेटर हैं और यह टीम विश्व की नंबर एक वनडे टीम होने का दर्जा रखती है। उनके पास एक बढि़या बेंच स्ट्रेंथ भी है। लिहाजा इस टीम को मात देना टीम इंडिया के लिए गर्व की बात है।

भारत ने यह मैच अपने युवा बल्लेबाजों की दम पर जीता। उसके दोनों सलामी बल्लेबाज सस्ते में लौट आए थे लेकिन बाद में आने वाले युवा बल्लेबाजों ने पारी को बखूबी संभाला। खासतौर पर विराट कोहली और सुरेश रैना को इसका श्रेय जाता है। इसके अलावा युवराज सिंह की सशक्त वापसी भी लाजवाब थी। हालांकि भारत ने आस्ट्रेलिया पर शुरू से पकड़ बना रखी थी। गेंदबाजों और क्षेत्ररक्षकों ने उसे बड़े स्कोर की तरफ बिल्कुल नहीं बढ़ने दिया, लेकिन अंतिम पांच ओवरों में आस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने 84 रन बनाते हुए मैच को चुनौतीपूर्ण स्थिति में ला खड़ा किया।

विनय कुमार, आशीष नेहरा और प्रवीण कुमार ने अंत में काफी निराश किया। कुलमिलाकर भारतीय युवा बल्लेबाजों की जितनी भी तारीफ की जाए कम होगी। दिसंबर में दक्षिण अफ्रीका के दौरे में इन युवाओं को एक और मौका दिया जाना चाहिए ताकि फरवरी में होने वाले विश्व कप से पहले उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खुद को फिट करने में आसानी हो।


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