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Monday, November 23, 2009

संभलकर मोबाइलवालों, कहीं फंस न जाना..

सरकार द्वारा बिना आईएमईआई नंबर वाले चायनीज मोबाइलों पर रोक लगाने की बात आते ही शहर में गलत तरीके से इन्हें देने का काम भी चल पड़ा है। इसमें न केवल सरकार को धोखा दिया जा रहा है बल्कि मोबाइलधारकों को भी ठगा जा रहा है।

इसलिए यदि आप भी अपने मोबाइल में यह नंबर डलवाने जा रहे हैं तो सावधान हो जाएं। क्योंकि बाजार में डाले जा रहे नकली आईएमईआई नंबर से आपका मोबाइल कुछ ही दिनों में बंद हो सकता है।

30 नवंबर से बाजार में बिना आईएमईआई नंबर वाले मोबाइल हैंडसेट काम करना बंद कर देंगे। सरकार द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से उठाए गए इस कदम के बाद इंदौर सहित देशभर में इस तरह के लाखों मोबाइल्स में फर्जी तरीके से आईएमईआई नंबर डालने का काम शुरू हो गया है। मात्र दो सौ रुपए में किया जा रहा यह काम कुछ स्थानों पर तो नियम-कानून के अनुसार किया जा रहा है लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह गलत तरीके से हो रहा है।

दूरसंचार विभाग एक डाटाबेस तैयार करता है, जिसमें सभी कंपनियों के आईएमईआई नंबर की जानकारी होती है। इसमें एंट्री के लिए मोबाइल कंपनियों को सरकार को एक निश्चित शुल्क जमा करना होता है। लेकिन शहर में गलत तरीके से जो नंबर डाले जा रहे हैं उसका पूरा पैसे ऐसे करने वालों की जेब में जमा हो रहा है।

क्या है आईएमईआई?

आईएमईआई यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्यूपमेंट आइडेंटिटी। हमारे नाम और पते की तरह की मोबाइल का नाम और पता आईएमईआई के माध्यम से पता चलता है। कंपनी द्वारा बेचे गए प्रत्येक मोबाइल में यह होता है, जिसकी जानकारी सरकारी डाटाबेस में होती है।

क्या है इसमें?

आईएमईआई नंबर 15 से 17 डिजिट के बीच होता है। इससे जीएसएम और यूएमटीएस नेटवर्क पर चलने वाले प्रत्येक मोबाइल का डाटाबेस तैयार होता है। मोबाइल नेटवर्क सेवा प्रदाय करने वाली प्रत्येक कंपनी के पास आईएमईआई नंबर से चलने वाले मोबाइल का संपूर्ण रिकॉर्ड रहता है। कॉल रिकॉर्ड के साथ ही लोकेशन आदि का पता भी इससे चल जाता है।

मोबाइल बॉडी को आइडेंटिफाई करता है।

यह टीएसी (टाइप एलोकेशन कोड) को दिखाता है अर्थात् हैंडसेट का कौन-सा मॉडल है।

यह मॉडल का सीरियल नंबर बताता है।

यह लुहन अल्गोरिद्म चैक डिजिट को बताता है, जो मोबाइल के सीरियल नंबर को बताता है।

यह सॉफ्टवेयर को प्रदर्शित करता है।

कैसे पता करते हैं?

आईएमईआई नंबर जानने के लिए हैंडसेट में *#06# टाइप करना होता है। इससे मोबाइल पर उस हैंडसेट का नंबर डिस्पले होता है। अधिकांशत: यह नंबर हैंडसेट की बॉडी, बैटरी या फिर मोबाइल के पैक पर लिखा रहता है। अगर यह नंबर 15 अंकों से कम का हो तो समझ लीजिए यह नकली है।

क्यों जरूरी है?

आपका मोबाइल सेट अगर गुम या चोरी हो जाता है तो आईएमईआई नंबर के माध्यम से इसे ट्रेस किया जा सकता है। पुलिस या गुप्तचर एजेंसियों को किसी विशेष व्यक्ति और नंबर को ट्रेस करने के साथ ही उसे पकड़ने के लिए भी आईएमईआई नंबर का पता होना जरूरी होता है। मोबाइल नेटवर्क कंपनियां जरूरी होने पर आईएमईआई नंबर की कॉल आना-जाना ब्लॉक कर देती है।

आईएमईआई की जगह डाले गए फर्जी डिजिट से मोबाइल बंद भी हो सकता है

शहर में दो लाख से ज्यादा चायनीज मोबाइल है। इनमें से अधिकांश बिना आईएमईआई नंबर वाले है। इन पर आईएमईआई नंबर के स्थान पर या तो 00000 या फिर कोई नकली नंबर आता है। तीन साल पहले बिकने शुरू हुए यह मोबाइल अधिकृत मोबाइल से बहुत कम कीमत के कारण तेजी से बिके थे। इसके बाद अब भारतीय कंपनियां अपने ब्रांड के नाम से इन मोबाइल को बेच रही है लेकिन इस पर आईएमईआई नंबर आ रहे हैं।

चल रहा है गोरखधंधा

सरकार ने जब से इन नंबरों के बिना बिकने वाले मोबाइल्स को बंद करने का आदेश जारी किया है तबसे इन मोबाइल्स पर संकट खड़ा हो गया है। दूरसंचार विभाग ने इसके लिए अधिकृत सेंटर्स खोले हैं लेकिन बाजार में कुछ लोग अधिकृत नहीं होकर भी दो सौ रुपए में गलत तरीके से आईएमईआई नंबर डालने का काम कर रहे हैं।

चायना और इसी तरह के बगैर आईएमईआई नंबर वाले मोबाइल में आईएमईआई नंबर डालने के लिए मोबाइल मार्केट में तीन साफ्टवेयरों का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। स्पाइडरमैन बाक्स, पीपीएफ बाक्स, आईएमईआई राइटर नाम के इन साफ्टवेयरों से आईएमईआई नंबर आसानी से डाले जा रहे हैं। वैसे इसके लिए एक हार्डवेयर की भी जरूरत होती है, जो करीब पांच हजार रुपए का आता है।

एडवांस साफ्टवेयर से डालते हैं नंबर

चायना और इसी तरह के बगैर आईएमईआई नंबर वाले मोबाइल में आईएमईआई नंबर डालने के लिए मोबाइल मार्केट में तीन साफ्टवेयरों का ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। स्पाइडरमैन बाक्स, पीपीएफ बाक्स, आईएमईआई राइटर नाम के इन साफ्टवेयरों से आईएमईआई नंबर डाले आसानी से डाले जा रहे हैं।

सरकार को लगा रहे हैं चूना

जो लोग गलत तरीके से यह काम कर रहे हैं, वह सीधे-सीधे सरकार को चूना लगा रहे हैं क्योंकि इसके लिए सरकार द्वारा निश्चित फीस 172 रुपए और अन्य संबंधित डाक्यूमेंट्स जमा नहीं दिए जा रहे हैं। इससे लाखों रुपए की चपत सरकार को लग चुकी है।

डाटाबेस में रजिस्ट्रेशन ही नहीं होगा

गलत तरीके से नंबर डाले गए मोबाइल थोड़े दिनों में ही बंद हो जाएंगे क्योंकि इसका रजिस्ट्रेशन सरकारी डाटाबेस में नहीं है। दुकानदार पुराने खराब हो चुके मोबाइल्स का आईएमईएम नंबर चुराकर उसमें पेस्ट कर रहे है। इससे यह मोबाइल थोड़े दिन तो चलेगा लेकिन जांच-पड़ताल होने पर बंद कर दिया जाएगा। कई-कई लोगों को एक ही नंबर कॉपी करके दे दिया गया है जबकि एक आईएमईआई नंबर का एक ही मोबाइल चल सकता है। इसलिए बाकी लोगों के मोबाइल बाद में बंद हो जाएंगे।

सिर्फ तीन जीआईआई सेंटर हैं शहर में

असली आईएमईआई नंबर सिर्फ जीआईआई साफ्टवेयर से ही डाला जाता है, इसके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है , लेकिन नकली नंबर ऑफलाइन ही डाला जाता है। मोबाइलों के आईएमईआई नंबर देने के लिए सरकार ने शहर में तीन डिस्ट्रिब्यूटरों को अधिकृत किया है जिसमें से एक तो पिछले पांच माह से अधिकृत है बाकी के दो को महीनेभर पहले ही अधिकृत किया गया है।

भविष्य में परेशानी आएगी

‘‘चायना से आने वाले मोबाइल बगैर सरकारी अनुमति के बेचे जा रहे हैं, ये नंबर किसी दूसरे हैंडसेंट्स के नंबर होते हैं। शहर के मोबाइल बाजार में नकली आईएमईआई नंबर बेचने का काम कई लोग कर रहे हैं। इस नकली नंबर से लोगों को भविष्य में काफी परेशानी होगी।

महेश जैन, ऑथोराइज्ड सेंटर प्रभारी

चीनी मोबाइल में चल रही है लोकल कारीगरी

पंद्रह मिनट की है प्रक्रिया

जिसे अपने मोबाइल का आईएमईआई राइट कराना है, उनका फोटो आईडी, और व्यक्ति का फोटो वेबकेम से लिया जाता है। इसके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया आनलाइन होती है। इस पूरी प्रक्रिया में दस से पंद्रह मिनट लगते हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए 199 रुपए लिए जाते हैं और इसके लिए व्यक्ति को रसीद भी दी जाती है। जबकि नकली नंबर के लिए लोगों को मोबाइल रिपेयरर के पास कुछ घंटों के लिए अपना मोबाइल छोड़ना होता है। इसी शर्त पर उसे आईएमईआई नंबर दिया जाता है।

ऐसा होना सुरक्षा के लिए खतरनाक है

‘‘आईएमईआई नंबर सिर्फ अधिकृत एजेंट के पास से ही मिल रहे हैं। इनको कहीं और से किसी साफ्टवेयर की मदद से कॉपी किए जाने के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। यदि ऐसा हो रहा है तो यह सुरक्षा के लिए खतरा है लेकिन कोई भी टेलीकॉम आपरेटर इसके लिए क्या कर सकता है।

पीयूष खरे जीएम बीएसएनएल

कई स्थानों पर डाले जा रहे हैं नकली नंबर

‘‘शहर में कई स्थानों पर नकली आईएमईआई नंबर डालने का काम चल रहा है। यह नंबर कुछ दिनों बाद फिर से बंद हो जाएंगे। वास्तव में सरकार के पास जो ऑनलाइन डाटाबेस जा रहा है, वही अधिकृत है। लोगों को इससे बचना चाहिए।

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