एक बार गांववालों ने अपने मुखिया से पूछा कि इस बार ठंड कैसी पड़ेगी, ताकि वे उस हिसाब से अलाव जलाने के लिए लकड़ियां इकट्ठा करके रख लें। लेकिन मुखिया नया था। वह नई पीढ़ी का था, शहर में पढ़कर आया था, इसलिए उसे मौसम का अनुमान लगाने के पारंपरिक तरीक़े नहीं पता था। बावजूद इसके वह मुखिया था, इसलिए उसे अपना अज्ञान जाहिर करने में बड़ी शर्म आई। सो, उसने बीचका रास्ता निकाते हुए कह दिया कि इस बार ठंड पड़ेगी।
मुखिया की बात मानकर गांववालों ने लकड़ी जुटाना शुरू कर दिया। इधर मुखिया ने गोलमोल जवाब तो दे दिया था, पर वह अपने लोगों को सही जानकारी भी देना चाहता था। तो उसने पास के शहर में स्थित मौसम विभाग से संपर्क किया। मुखिया ने पूछा कि इस बार ठंड के बारे में क्या अनुमान है, तो मौसम विभाग के क्लर्क ने बताया कि इस दफ़ा अच्छी ठंड पड़ने की संभावना है।
मुखिया ने अपने गांव वालों को यही बात बता दी। अब वे और तेज़ी से लकड़ियां इकट्ठा करने लगे। कुछ दिनों बाद मुखिया ने मौसम के पूर्वानुमान की और पुष्टि कर लेनी चाही। उसने फिर से शहर जाकर मौसम विभाग से पूछा। विभाग ने उसे बताया कि इस बार बड़ा तेज़ जाड़ा पड़ने वाला है।
मुखिया ने जब अपने समुदाय वालों को बताया, तो उसकी बात पर भरोसा कर वे रात-दिन लकड़ियां इकट्ठा करने में जुट गए। वे कोई और काम न करते, बस लकड़ियां जमा करते रहते।
जाड़े का मौसम अब क़रीब था। ज्यादा ठंड पड़ने के कोई लक्षण न थे। तो मुखिया ने एक बार फिर मौसम विभाग से जानना चाहा। इस बार उसे जवाब मिला कि अबके तो बड़ी भयंकर ठंड पड़ने वाली है।
इस पूर्वानुमान से हैरान मुखिया ने पूछा कि आख़िर आप इतने भरोसे से कैसे कह सकते हैं, आपको ऐसा कौन-सा लक्षण दिख रहा है? मौसम विभाग के क्लर्क ने जवाब दिया, ‘हम लगातार देख रहे हैं कि इस बार पड़ोस के गांव में रहने वाले लोग पागलों की तरह लकड़ियां इकट्ठा कर रहे हैं!’मुखिया की बात मानकर गांववालों ने लकड़ी जुटाना शुरू कर दिया। इधर मुखिया ने गोलमोल जवाब तो दे दिया था, पर वह अपने लोगों को सही जानकारी भी देना चाहता था। तो उसने पास के शहर में स्थित मौसम विभाग से संपर्क किया। मुखिया ने पूछा कि इस बार ठंड के बारे में क्या अनुमान है, तो मौसम विभाग के क्लर्क ने बताया कि इस दफ़ा अच्छी ठंड पड़ने की संभावना है।
मुखिया ने अपने गांव वालों को यही बात बता दी। अब वे और तेज़ी से लकड़ियां इकट्ठा करने लगे। कुछ दिनों बाद मुखिया ने मौसम के पूर्वानुमान की और पुष्टि कर लेनी चाही। उसने फिर से शहर जाकर मौसम विभाग से पूछा। विभाग ने उसे बताया कि इस बार बड़ा तेज़ जाड़ा पड़ने वाला है।
मुखिया ने जब अपने समुदाय वालों को बताया, तो उसकी बात पर भरोसा कर वे रात-दिन लकड़ियां इकट्ठा करने में जुट गए। वे कोई और काम न करते, बस लकड़ियां जमा करते रहते।
जाड़े का मौसम अब क़रीब था। ज्यादा ठंड पड़ने के कोई लक्षण न थे। तो मुखिया ने एक बार फिर मौसम विभाग से जानना चाहा। इस बार उसे जवाब मिला कि अबके तो बड़ी भयंकर ठंड पड़ने वाली है।
सबक़ ज़िंदगी का
1. आप जिसे अक्लमंद और ज्ञानी मान रहे हैं, हो सकता है कि वह आपसे ही अक्ल ले रहा हो।
2. किसी भी सूचना पर भरोसा करने से पहले उसके स्रोत के बारे में भी जान लें।
gazab ki baat
ReplyDeleteहिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और शुभकामनायें
ReplyDeleteकृपया दूसरे ब्लॉगों को भी पढें और उनका उत्साहवर्धन
करें
चिट्ठा जगत में आपका हार्दिक स्वागत है. लेखन के द्वारा बहुत कुछ सार्थक करें, मेरी शुभकामनाएं.
ReplyDelete---
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