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Monday, January 31, 2011

राग स्विस कल्याणी की एक बंदिश

यहाँ प्रस्तुत पंक्तियाँ "श्री अशोक चक्रधर जी" की कलम से लिखी गयी है|


आयो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

यार से या हथियार से आयो,
ड्रग ट्रैफिक व्यापार से आयो
तस्करिया गलियार से आयो
पायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

नेता से या अभिनेता से आयो
लेता से आयो कि देता से आयो
लोकतंत्र के प्रणोता से आयो
लायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

कोरट ने अरदास लगाई
सीवीसी चुप आरबीआई
बात पते की नहीं बताई
खायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

ना कोई कुर्की ना कोई नालिश
ना कोई बंदिश ना कोई जुंबिश
स्विस कल्याणी की ये बंदिश
गायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

अंतर्यामी ये धन रब सा
अविगत अंतलरेक अजब सा
हम पर ये अन्याय गजब सा
ढायो कहां से धन स्याम?
बता दे सखि
आयो कहां से धन स्याम?

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