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Friday, January 28, 2011

क्रिकेट जगत की अबूझ पहेली हैं वाल्सन


 क्रिकेट जगत कर यह सबसे बड़ी पहेली हो सकती है कि एक खिलाड़ी विश्वकप विजेता टीम का सदस्य रहा हो, लेकिन उसे टूर्नामेंट ही नहीं अपने करियर में भी एक बार भी अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का कभी मौका नहीं मिला। इस अबूझ पहेली का जवाब है भारत के बाएं हाथ के मध्यम गति के तेज गेंदबाज सुनील वाल्सन। 
वाल्सन 1983 में विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम के सदस्य तो थे लेकिन उन्होंने पूरा टूर्नामेंट ड्रेसिंग रूम में बैठकर एक दर्शक की तरह टीम को जीतते हुए देखकर गुजार दिया। यही नहीं वाल्सन भारत के लिए कभी कोई मैच नहीं खेल पाए। वाकई यह हैरानी की बात है कि जिस खिलाड़ी को विश्वकप टीम में चुना गया उसे कभी वनडे मैच खेलने का भी मौका नहीं दिया गया। विश्वकप जीतने के बाद यह सवाल बराबर उठता रहा था कि आखिर वाल्सन का टीम में चयन किस आधार पर किया गया था। यदि उनमें इतनी क्षमता थी कि वे विश्व कप टीम में चुने गए थे तो फिर उन्हें कभी भारत के लिए खेलने का मौका क्यों नहीं दिया गया?
आंध्र प्रदेश के सिकंदराबाद में जन्मे इस क्रिकेटर ने अपने प्रथम श्रेणी करियर में दिल्ली और रेलवे की तरफ से मैच खेले थे। उन्होंने 75 प्रथम श्रेणी मैचों में 212 विकेट लिए थे। उनका प्रथम श्रेणी करियर 1977 से लेकर 1988 तक चला था। 1983 की विश्वकप विजेता भारतीय टीम में कपिल देव, रोजर बिन्नी, मदनलाल और बलविंदर सिंह संधू जैसे मध्यम तेज गेंदबाज थे। इस टीम में मोहिंदर अमरनाथ भी धीमी मध्यम तेज गेंदबाजी किया करते थे। इन गेंदबाजों की उपस्थिति में वाल्सन के लिए टीम में वैसे ही कोई जगह नहीं थी। वाल्सन इस टीम में रहते हुए सिर्फ इंग्लैंड का भ्रमण कर भारत लौट आए थे।
इसके अलावा एक सवाल यह भी उठता है कि वाल्सन बेशक विश्व कप में कोई मैच नहीं खेल पाए थे, लेकिन उन्हें कम से कम एकाध अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका तो मिल ही सकता था। मगर उन्हें ऐसा मौका भी नसीब नहीं हुआ। इसी क्रम में जब विश्व विजयी भारतीय क्रिकेट टीम को जीत के 25 वर्ष पूरे होने पर जून, 2008 में एक स्वागत समारोह का आयोजन करा कर सम्मानित किया गया था तब उस कार्यक्रम में टीम के सभी सदस्य मौजूद थे। उस दौरान विजयी टीम के कप्तान कपिलदेव ने हर खिलाड़ी के लिए कुछ न कुछ कहा था। मगर जब बारी सुनील वाल्सन की आई तो कपिल ने बस इतना ही कहा, मुझे उनके लिए गहरा अफसोस है। यह वाकया आज भी एक ऐसी अबूझ पहेली है जिसका किसी के पास कोई जवाब नहीं है।

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