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Thursday, January 6, 2011

जहाज का राज़


उन्नीसवीं सदी की ये सबसे रहस्यमयी समुद्री घटना है। 4 दिसंबर 1872 की बात है, अटलांटिक सागर में एक व्यापारी जहाज मिला था। मैरी सेलेस्टी नामक ये जहाज पूरी तरह सुरक्षित था लेकिन उसमें इंसान का नामोनिशान नहीं था। बावजूद इसके की उन दिनों मौसम भी साफ रहा था और जहाज का स्टाफ तजुर्बेकार था।


जहाज की कंडीशन भी अच्छी थी और स्ट्रेट ऑफ गिबराल्टर की तरफ उसका सफर जारी था। ये जहाज समुद्र में एक महीने से था और उसमें खाने-पीने का सामान अगले छह महीनों के लिए पर्याप्त था।


जहाज के हालात देखकर पता चलता था कि किसी चीज को हाथ तक नहीं लगाया गया है। यहां तक की यात्रियों का सामान भी अनछुआ अपनी जगह पर रखा था। इसमें बहुत सा कीमती सामान भी था। इसके बाद इन लोगों को कभी भी कहीं भी देखा नहीं गया और न ही इनके बारे में सुना गया। ये इतिहास की सबसे बड़ा समुद्री रहस्य है। 1861 में ये नोवा स्कोटिया के स्पैंसर आईलैंड के एक छोटे से गांव में बनाया गया था। इस छोटे समुदाय द्वारा बनाए गए पहले बड़े जहाजों में से ये एक था। इसका नाम एमाज़ॉन रखा गया था।


सबसे पहले आठ लोगों ने मिलकर इसे खरीदा था। इसके पहले कैप्टन थे रॉबर्ट मैक लैलन। जहाज की कमान हाथ में लेने के नौ दिन बाद ही उन्हें निमोनिया हो गया और पहली ही यात्रा में उनकी जान चली गई। इसके बाद दो और कैप्टन्स की भी जहाज पर ही जान गई। ये जहाज कभी फायदे में नहीं रहा। इसके मालिकों को नुकसान ही उठाना पड़ा।


इसलिए ये जहाज बदनाम हो गया और बार-बार बिकता गया। आखिरकार 1870 में इसे न्यूयॉर्क भेजा गया, जहां रिपेयरिंग के बाद इसे मैरी सेलेस्टी नाम दिया गया। इस बार जहाज के कैप्टन बने बैंजामिन ब्रिग्स। 1872 के इस हादसे में ब्रिग्स ही कैप्टन थे।


इसके बाद ये जहाज कई बार बिका लेकिन खरीदने वाले घाटे में ही रहे। इसकी बदनामी के चर्चे मशहूर हो गए थे। 1885 में इसके मालिक थे जीसी पार्कर, उन्होंने जहाज डुबाकर इंशोरेंस का पैसा वसूलना चाहा था। हुआ इसका उलटा, जहाज नहीं डूबा।


इसके बाद उन्होंने जहाज में आग लगाने का फैसला किया। इस मामले की जांच में उनका राज़ खुल गया और उन्हें गिरफ्तार किया गया। ये बात अलग है कि सजा से पहले उनकी मौत भी रहस्यमयी तरीके से हो गई थी। इसकी रहस्यमयी कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आज भी इसके वजूद को लेकर बहस जारी है।

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